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आप गांधी का चश्मा लेकर उनके चश्मे से देख नहीं सकते जनाब

ये देश की ऐतिहासिक जगह, धरोहर गांधी भवन का पुरुष प्रसाधन कक्ष( mens toilet) है. घुसते ही पेशाब-पोट्टी की प्रेशर भूलकर आप उल्टी कर देने की प्रेशर में आ जाएंगे. आप दो मिनट तक इस वॉशरुम में रह गए तो आपकी तबीयत खराब हो जाएगी. आप जो ये दीवारों पर, बेसिन और टायल्स पर गहरे लाल निशान देख रहे हैं, न जाने कितने महापुरुषों की छूटी ही धार की निशानी बनकर जंग के रंग में तब्दील हो चुकी है. लेकिन आज से दो साल पहले जिस तरह देखकर गया था, इसमे स्वच्छ भारत अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कोई सुधार, बदलाव नहीं हुए.

कौन दिग्गज, कौन दमदार-असरदार नहीं आते हैं इस गांधी भवन में. अपनी आंखों के सामने से देखा कि कई भारी-भरकम लोग( कुछ कान में जनेऊ लपेटकर) घुसे-बाहर निकले लेकिन चेहरे पर कोई आक्रोश नहीं. कोई बेचैनी नहीं कि जिस शख्स के नाम पर देश में करोड़ों रुपये स्वच्छ भारत अभियान के तहत पानी की तरह बहाए जा रहे हों, वहीं उस शख्स के नाम पर इस भवन की ट्वायलेट में पानी बहाने तक की सही व्यवस्था नहीं है. अंदर घुसने पर पेशाब की गंध और गैस से ऐसा लगता है जैसे किसी ने अमोनिया गैस की सिलेंडर खोल दी हो. आंखें ठीक से खुलती ही नहीं.

सुबह से घर से बाहर रहने की हालत में शाम जब “मुजफ्फरनगर अभी बाकी है” की स्क्रीनिंग के लिए दिल्ली के इस गांधी भवन में पहुंचा तो सभागार में पहुंचने के पहले वॉशरूम जाना जरुरी लगा. गर्मी, पसीने और गहरी थकान के बीच हालत तो पहले से ही पस्त थी, भीतर जाने के बाद लगा पेशाब की इस गंध से बेहोश हो जाउंगा.

स्वच्छ भारत का जिस शख्स ने गांधी का ये चश्मा लेकर लोगो बनाया, उसे सम्मानित किया गया लेकिन कभी पलटकर ये नहीं सोचा गया कि गांधी का चश्मा ले लेने से उनके चश्मे से समाज को, परिवेश को देखने की समझ पैदा नहीं हो जाती. वो चुनावी नारे, भाषणों और विज्ञापनों की खुराक भले ही बन जाए लेकिन सच में सफाई बरतने के लिए जमीनी स्तर पर पहल करनी होती है. गांधी शोचालय की सफाई को लेकर बेहद चौकस रहा करते थे. वो खुद इसकी सफाई किया करते लेकिन उनकी इस ऐनक के लिए जाने और एक से एक ब्रांड मैनेजरों की फौज झोंक दिए जाने के बावजूद उनकी खुद की जगह इस हालत में है..

हां इस बात के लिए गांधी प्रतिष्ठान का शुक्रिया जरुर अदा की जानी चाहिए कि अभी भी वहां इस बात की गुंजाईश है कि सत्ता से असहमति का सिनेमा-प्रदर्शन, संगोष्ठी का आयोजन कर सकते हैं.

#‎दरबदरदिल्ली

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