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‘अ ‘ से अन्ना ‘अ ‘ से आंदोलन

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हिन्दी स्वरमाला का पहला स्वर है ‘ अ ‘ ,’अ ‘ से  अन्ना स्वर पुरे  देश में गुंजा ‘अ ‘ से आंदोलन बना ‘अ ‘ से अनशन तक भी पहुंचा, ‘अ ‘ से अन्ना बने ‘अ ‘ से अभिमान का प्रतीक, देश के लोगों ने उनके ‘अ ‘ से अभियान को सफल भी बनाया , देश की सत्ता हिली ,‘अ ‘ से अर्थहीन ओर अर्थपूर्ण संवाद शुरु हो गए , तभी देश के राजनैतिक दलों ,नेताओ से लेकर प्रतिष्ठित व्यक्तिओ ओर जाने माने सितारें भी ‘अ ‘ से अन्ना के ‘अ ‘ स्वर में ‘ अ ‘ स्वर मिलाने लगे!

‘अ ‘ से आंदोलन का ‘अ ‘ से अभिन्न अंग ओर आधार था लोकपाल विधेयक , मुद्दा था काले धन का देश में वापस ‘अ ‘ से आना ओर भरष्टाचार का सम्पूर्ण रूप से ‘अ ‘ से अन्त सभी का ‘अ ‘ स्वर एक था , ‘अ ‘ से अनैतिक होते हुए भी नैतिक बातें करने वाले कम नहीं थे!

‘अ ‘ से अपूर्ण रूप से लोकपाल विधेयक संसद में पारित भी हुआ ‘अ ‘ से अपूर्णता के कारण ‘अ ‘ से अवरोध भी सामने आए फिर भी सब देखते रहे ,‘अ ‘ से आंदोलन अटूट था पर टूट गया ‘अ ‘ से अनशन भी अकस्मात् समाप्त हो  गया!

‘अ ‘ स्वर अन्ना मन्द पड़ा  ‘अ ‘ से अन्ना का ‘अ ‘ से आंदोलन ‘अ ‘ से अपूर्ण रह गया ओर ‘अ ‘ से आंशिक रूप से सफल होते हुए भी ‘अ ‘ स्वर का उन्हीं के ‘अ ‘ से अनुयाइयों ने बाहरी तकतों के साथ मिलकर ‘अ ‘ से अन्त कर दिया!

अब बचा है तो केवल एक  ‘अ ‘ से अंतहीन एक लम्बा ‘अ ‘ से अंतराल ना जाने कब बनेगा सशक्त्त लोकपाल , कब देश मे वापस ‘अ ‘ से आएगा काला धन , ओर न जाने कब होगा इस भरष्टाचार का ‘अ ‘ से अन्त !

‘अ ‘ स्वर जो साथ जुड़े तो कई शब्दो , अर्थो ओर वाक्यों को पूर्ण करता है पर अकेला रह जाने पर वह अपने आप मे केवल एक अपूर्ण स्वर ही रह जाता है 

निर्दलीय रवि 

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