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अरमानों की चिता

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चन्द लुटेरों ने मिलकर

देश की सम्पदा चुराली

पूंजीपतियों ने नेताओं से मिलकर

जनता की कुर्की करवाली

खुशियों की यहाँ मौत हुई है

अरमानों की चिता जली है

आने को आई आज़ादी

पर भूख से जनता यहाँ मरी है

गिद्ध खा रहे दूध मलाई

हंस बसे हैं चिड़ियाघर

मालिक बन पूंजीपति डोलें

भृष्टाचारी बैठे सिंहासन पर

मालिक तो शोषक ही हैं

जनता तो बस दासी है

ऐसा आया वक्त कि, जनता

भृष्टों की चपरासी है

माँ, बहिनों की अस्मत लूटें

साधू बन दुराचार करें

धर्मों के ठेकेदार बने वे

जनता पर अत्याचार करें

यहाँ पर ऐसा क़ानून रहा है

मासूमों ने हर ज़ुल्म सहा है

जब-जब उनके जश्न हुए हैं

तब-तब मेरा खून बहा है

तब-तब मेरा खून बहा है

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