Corruption Hindi Opinion Poem Poetry Poverty

अरमानों की चिता

चन्द लुटेरों ने मिलकर

देश की सम्पदा चुराली

पूंजीपतियों ने नेताओं से मिलकर

जनता की कुर्की करवाली

खुशियों की यहाँ मौत हुई है

अरमानों की चिता जली है

आने को आई आज़ादी

पर भूख से जनता यहाँ मरी है

गिद्ध खा रहे दूध मलाई

हंस बसे हैं चिड़ियाघर

मालिक बन पूंजीपति डोलें

भृष्टाचारी बैठे सिंहासन पर

मालिक तो शोषक ही हैं

जनता तो बस दासी है

ऐसा आया वक्त कि, जनता

भृष्टों की चपरासी है

माँ, बहिनों की अस्मत लूटें

साधू बन दुराचार करें

धर्मों के ठेकेदार बने वे

जनता पर अत्याचार करें

यहाँ पर ऐसा क़ानून रहा है

मासूमों ने हर ज़ुल्म सहा है

जब-जब उनके जश्न हुए हैं

तब-तब मेरा खून बहा है

तब-तब मेरा खून बहा है

———–

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *