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अब ‘हेड ट्रांसप्लांट’ दूर नहीं!

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चिकित्सा की दुनिया मे दिन ब दिन इंसान नई ऊँचाइयों को छु रहा है। टी.बी., चिकन पौक्स, स्मौल पॉक्स जैसे खतरनाक बीमारियों का खात्मा भी इंसान ने अपनी लगन, कोशिश और दृढ संकल्प से पूर्ण किया। लेकिन फिर भी ऐसे कई रोग अब भी उपस्थित हैं जिस पर इंसान ने जीत हासिल नहीं की है। कैंसर, एड्स, लकवा जैसी बीमारियाँ अब भी मानवता के लिए ‘खतरा’ का प्रतीक है। ज़्यादातर मामलों मे शरीर की दुर्गम स्थिति के कारण मरीज़ को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ता है या फिर अपाहिज की ज़िन्दगी कबूल करनी पड़ती है। लेकिन कुछ महीनों मे यह भी बदल जाएगा।

इटली के एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर्गियो कानावैरो ने ‘हेड ट्रांसप्लांट’ यानी ‘सिर प्रत्यारोपण’ का प्रस्ताव सामने रखा है और कहा है की 2017 के अंत तक यह सपना हकीकत मे बदल सकता है। लेकिन इसके लिए कानावैरो को चिकित्सा समुदाय से काफी कटु वचन सुनने पड़े हैं। ज़्यादातर विशेषज्ञों ने कानावैरो को ‘पागल, लालची, प्रचार के लिए भूखा भेड़िया’ इत्यादि से संबोधित किया है। मानव इतिहास मे इस तरह के परीक्षण पर सभी के मन मे प्रश्न हैं। और हो भी क्यों ना? आखिर आप एक इंसान का सर धढ़ से अलग कर किसी और शरीर पर विराजमान करेंगे! ऐसे मे जान जाने का और रोग-संचार का ख़तरा भी काफी ज़्यादा है।

लेकिन इन सब के बावजूद कानावैरो का प्रयास प्रशंसनीय है। लेकिन इसमे मुश्किलें भी काफी हैं। सबसे बड़ी बात यह है की सर को धड से अलग करने के बाद यदि पांच मिनट के अन्दर उसे ऑक्सीजन नहीं मिला तो सर की मौत निश्चित है। साथ ही सर को जोड़ने के लिए नसों, मासपेशियों एवं रीढ़ की हड्डी को ठीक से जोड़ना और सिलना आवश्यक है। यहाँ गलती की कोई गुंजाइश नहीं है! कानावैरो के अनुसार इस प्रयोग मे भाग लेने के लिए एक चीनी शख्स ने अपनी सहमति दी है जो की लकवा से पीड़ित है। ऑपरेशन मे कम से कम 36 घंटे का समय और 20 से ज्यादा शल्य चिकित्सक की आवश्यकता बताई जा रही है। अब तक यह प्रक्रिया सिर्फ कल्पित विज्ञान तक ही सीमित रही है। यदि कानावैरो अपने इस परीक्षण मे पूरी तरह कामयाब होते हैं, तो वाकई मे इतिहास के के पन्नों मे उनका नाम सुन्हेरे अक्षरों मे लिखा जाएगा। लेकिन अगर कानावैरो नाकाम हुए  तो बची ज़िन्दगी उन्हें जेल मे कटवानी होगी!

आशा करते हैं की कानावैरो अपनी प्रक्रिया मे सफल होकर मानवता का कल्याण करें!

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