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अबकी बार जनम पाया तो

अबकी बार जनम पाया तो,
प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा.

नैनों में तस्वीर तुम्हारी,
पांओं में ज़जीर पड़ी है.
हर ख़त का उत्तर कैसे दूँ ?
पहरे पर तक़दीर खड़ी है.

कल को राज -ताज बदलेगा.
ये सामान -साज बदलेगा.
तुम सुनना, संसार सुनेगा.
गीत-अगीत सभी गाऊंगा.

अबकी बार जनम पाया तो,
प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा.

तुम मेरी हर सच्चाई को,
कवि का पागलपन कहती हो.
पर मेरे गीतों से अपना
आँचल भरने को कहती हो.

ये कैसी है रीति तुम्हारी ?
ये कैसी है प्रीति तुम्हारी ?
ये अजीब आवरण हटेगा.
भेद-अभेद जान जाऊंगा.

अबकी बार जनम पाया तो,
प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा.

सजी बारात गांव के बाहर,
कभी नहीं आयी अगवानी,
प्रतिमा को न फूल दे पाई,
रही अधूरी सी ज़िंदगानी.

ऐसा क्यों अक्सर होता है ?
यौवन बचपन सा रोता है.
सुबकुछ लिख देने वाले से,
इतना और लिखा लाऊंगा.

अबकी बार जनम पाया तो,
प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा.

जीवन क्या ? जग के मेले में
एक पहनावा धूप-छांव का.
कोई रीझे, कोई खीजे,
मोहक झगड़ा मोल-भाव का.
यदि मैं तुम्हें गांव लाया तो,
दूरी सभी मिटा आया तो,
यह प्यारी पोशाक जनम की,
फिर से कहाँ पहन पाउँगा ?

अबकी बार जनम पाया तो,
प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा.

 

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One comment

  1. Jab ye sase pyar ke samunder se ho kar baras jayagi to aasman ki aur deek awaz lagaoga ye jaam akhri ha bass ab tumeha paoga.

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