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अंबेडकर की कलम

क्रांति के लिए जली मशाल,

क्रांति के लिए बढ़े कदम ॥

अपमान के विरुद्ध सम्मान के लिए,

शोषण के विरुद्ध अरमान के लिए,

दलित, शोषित, पिछड़ी जाति के लिए,

हम लड़ेंगे हमने ली है कसम ।

क्रांति के लिए जली मशाल,

क्रांति के लिए बढ़े कदम ॥

छिन रही हैं आदमी की रोटियाँ,

बिक रही हैं शोषितों की बेटियाँ,

किंतु पूंजीपति, राजनेता मिलकर

शोषकों के साथ, भर रहे हैं कोठियाँ ।

लूट का यह राज हो ख़तम

शोषण का यह राज हो ख़तम ॥

तय है जय, उस शोषित अवाम की,

दलित, कमजोर, पिछड़े समाज की,

सम्मान के लिए लड़ रहे जवान की,

लिख गयी है अंबेडकर की कलम ।

क्रांति के लिए जली मशाल,

क्रांति के लिए बढ़े कदम ॥

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